अखंडा मूवी का विरोध तांडव जैसी वेब सीरीज को सपोर्ट ऐसा क्यों ?


साउथ सिनेमा की फिल्मे आपको एक साथ कई सिख देती हैं. एक जुट होकर परिवार में किस तरह से रहना हैं. बड़ो का सम्मान किस तरह से होना चाहिए. घर का बुजुर्ग ही घर की शान होता हैं. अपने संस्कारो को हमेशा सबसे आगे रखो. किसी तरह की कोई गंदगी नहीं होती और ना ही किसी धर्म पर टिक टिपण्णी की जाती हैं.

वही दूसरी तरफ बॉलीवुड में प्यार, मोहबब्त, ड्रग्स, सेक्स, धोखा, देश के साथ धोखा, अंडरवर्ल्ड के लोगो को गैंगस्टर को महान दिखाना. हिन्दू धर्म का अपमान करना. और ये काम सिर्फ फिल्म के माध्यम से ही नहीं होता हैं बल्कि कई ऐसे बिग्रेड कलाकार हैं जो खुले आम हिन्दू धर्म पर हमले करते हैं.

जो लोग आज से दस साल पहले ये कहा करते थे की साउथ की फिल्मे बेवकूफी भरी हैं, इनकी फिल्मो में कोई लॉजिक नहीं होता हैं आज वही लोग कहते हैं बेवक़ूफ़ साउथ सिनेमा के फिल्म मेकर्स नहीं थे हम थे जो समय रहते उन्हें समझ नहीं पाए. साउथ सिनेमा आज दुनिया का ताकतवर सिनेमा बनता जा रहा हैं और बॉलीवुड पीछे होता जा रहा है हर मामले में.

अब एक फिल्म आयी हैं नन्दमूरी बाला कृष्णा की जिसका नाम हैं अखंडा. अब जैसी ही इस फिल्म का पोस्टर आया वैसे ही एक राजनीतिक भूचाल भी आ गया. ये बात होने लगी की ये फिल्म मिशनरीज के लिए ख़तरा हैं जो धर्म परिवर्तन का काम करते हैं. क्यूंकि ऐसी कुछ भी चीज़ होती हैं तब मिशनरीज घबरा जाते हैं.

हिन्दू धर्म के गरीब, आदिवासी, बेबस लोगो को पैसे का लालच और ना जाने किन किन चीज़ो का डर दिखाकर उनका धर्म परिवर्तन कराया जाता है और ये पूरे देश में चल रहा हैं. और ये चीज़े मैंने सामने जाकर भी देखी हैं की आखिर होता क्या हैं लोग कैसे कन्वर्ट हो जाते हैं.

जो चीज़े वहा देखने को मिलती हैं वो वाकई एक आम इंसान को उसका धर्म परिवर्तन कराने के लिए काफी हैं. सबसे बड़ी चीज़ होती हैं डर. और डर का धंदा कभी मंदा नहीं पड़ता हैं. लोगो को डराया जाता हैं की येशु की शरण में आ जाओ वो तुम्हरे दुःख दूर करेंगे.

अपने घर की देवी देवताओ की मूर्तीया तोड़ दो. ये शैतान हैं. सिर्फ एक ही प्रभु हैं. वो आएगा और तुम्हे स्वर्ग लेकर जाएगा. सफ़ेद बादलो के पार. येशु में आओगे तो स्वर्ग जाओगे..

अब देखो येशु को मानना गलत नहीं हैं लेकिन उसी येशु के नाम पर इमोशनल बालक मेल, डर दिखाकर गरीबो को भ्रमित करना गलत हैं. ऐसे कई वीडियोस आपने देखे होंगे जिसमे कैंसर, एड्स ना जाने कितनी बीमारियों को ठीक करने के दावा करते है ये पास्टर. जबकि धर्म परिवर्तन करनेवाले यही पास्टर जिनकी लाखो की संख्या में कोरोना के चलते मौत हो गयी.

अब इसी मूवी का विरोध खासकर केरला में हो रहा हैं. और ये फिल्म अखण्डा रिलीज़ के बाद अब तक डेढ़ सौ करोड़ के करीब पहुंच चुकी हैं. जबकि इसमें मिशनरीज के खिलाफ कुछ भी नहीं हैं. लेकिन हिन्दू धर्म पर उन्हें इस तरह की बनी फिल्मे डराती हैं. वो मिशनरीज जिनका पूरा बिजनेस ही डर पर टिका हैं.

तांडव जैसी ना जाने कितने हिन्दू विरोधी फिल्म और वेब सीरीज बनती हैं तब उनका विरोध ये लोग नहीं करते हैं क्यूंकि उसमे हिन्दू धर्म का मज़ाक बनाया जाता हैं लेकिन अखंडा जैसी मोवी अखंडा मूवी का विरोध तांडव जैसी वेब सीरीज को सपोर्ट ऐसा क्यों ?

साउथ सिनेमा की फिल्मे आपको एक साथ कई सिख देती हैं. एक जुट होकर परिवार में किस तरह से रहना हैं. बड़ो का सम्मान किस तरह से होना चाहिए. घर का बुजुर्ग ही घर की शान होता हैं. अपने संस्कारो को हमेशा सबसे आगे रखो. किसी तरह की कोई गंदगी नहीं होती और ना ही किसी धर्म पर टिक टिपण्णी की जाती हैं.

वही दूसरी तरफ बॉलीवुड में प्यार, मोहबब्त, ड्रग्स, सेक्स, धोखा, देश के साथ धोखा, अंडरवर्ल्ड के लोगो को गैंगस्टर को महान दिखाना. हिन्दू धर्म का अपमान करना. और ये काम सिर्फ फिल्म के माध्यम से ही नहीं होता हैं बल्कि कई ऐसे बिग्रेड कलाकार हैं जो खुले आम हिन्दू धर्म पर हमले करते हैं.

जो लोग आज से दस साल पहले ये कहा करते थे की साउथ की फिल्मे बेवकूफी भरी हैं, इनकी फिल्मो में कोई लॉजिक नहीं होता हैं आज वही लोग कहते हैं बेवक़ूफ़ साउथ सिनेमा के फिल्म मेकर्स नहीं थे हम थे जो समय रहते उन्हें समझ नहीं पाए. साउथ सिनेमा आज दुनिया का ताकतवर सिनेमा बनता जा रहा हैं और बॉलीवुड पीछे होता जा रहा है हर मामले में.

अब एक फिल्म आयी हैं नन्दमूरी बाला कृष्णा की जिसका नाम हैं अखंडा. अब जैसी ही इस फिल्म का पोस्टर आया वैसे ही एक राजनीतिक भूचाल भी आ गया. ये बात होने लगी की ये फिल्म मिशनरीज के लिए ख़तरा हैं जो धर्म परिवर्तन का काम करते हैं. क्यूंकि ऐसी कुछ भी चीज़ होती हैं तब मिशनरीज घबरा जाते हैं.

हिन्दू धर्म के गरीब, आदिवासी, बेबस लोगो को पैसे का लालच और ना जाने किन किन चीज़ो का डर दिखाकर उनका धर्म परिवर्तन कराया जाता है और ये पूरे देश में चल रहा हैं. और ये चीज़े मैंने सामने जाकर भी देखी हैं की आखिर होता क्या हैं लोग कैसे कन्वर्ट हो जाते हैं.

जो चीज़े वहा देखने को मिलती हैं वो वाकई एक आम इंसान को उसका धर्म परिवर्तन कराने के लिए काफी हैं. सबसे बड़ी चीज़ होती हैं डर. और डर का धंदा कभी मंदा नहीं पड़ता हैं. लोगो को डराया जाता हैं की येशु की शरण में आ जाओ वो तुम्हरे दुःख दूर करेंगे.

अपने घर की देवी देवताओ की मूर्तीया तोड़ दो. ये शैतान हैं. सिर्फ एक ही प्रभु हैं. वो आएगा और तुम्हे स्वर्ग लेकर जाएगा. सफ़ेद बादलो के पार. येशु में आओगे तो स्वर्ग जाओगे..

अब देखो येशु को मानना गलत नहीं हैं लेकिन उसी येशु के नाम पर इमोशनल बालक मेल, डर दिखाकर गरीबो को भ्रमित करना गलत हैं. ऐसे कई वीडियोस आपने देखे होंगे जिसमे कैंसर, एड्स ना जाने कितनी बीमारियों को ठीक करने के दावा करते है ये पास्टर. जबकि धर्म परिवर्तन करनेवाले यही पास्टर जिनकी लाखो की संख्या में कोरोना के चलते मौत हो गयी.

अब इसी मूवी का विरोध खासकर केरला में हो रहा हैं. और ये फिल्म अखण्डा रिलीज़ के बाद अब तक डेढ़ सौ करोड़ के करीब पहुंच चुकी हैं. जबकि इसमें मिशनरीज के खिलाफ कुछ भी नहीं हैं. लेकिन हिन्दू धर्म पर उन्हें इस तरह की बनी फिल्मे डराती हैं. वो मिशनरीज जिनका पूरा बिजनेस ही डर पर टिका हैं.

तांडव जैसी फिल्मे और वेब सीरीज जिनका पूरा मकसद हिन्दू विरोध हैं इन फिल्मो से इन मिशनरीज़ को डर नहीं लगता हैं क्यूंकि इनका एजेंडा इसमें फिट बैठता हैं. होना ये चाहिए की हर धर्म का सम्मान करो. किसी की मज़बूरी को अपना बिजनेस मत बनाओ.

तो अखंड जैसी मूवी हर किसी को देखनी चाहिए. इसमें किसी धर्म एक विरोध नहीं दिखाया गया. बल्कि अपने धर्म पर बनी फिल्म हैं.


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